UP के अवध की राजनीति का केंद्र बने बृजभूषण, 50 विधानसभा सीटों पर फिर बढ़ी सियासी चर्चा
Rajmangal singh
गोंडा/अयोध्या। अवध और देवीपाटन मंडल की राजनीति में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों की करीब 50 विधानसभा सीटों पर आज भी उनका प्रभाव बना हुआ है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में व्यापक प्रचार किया था, जिसका लाभ भाजपा को कई सीटों पर मिला। वहीं, वर्ष 2023 में महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद उनकी सक्रिय भूमिका कुछ समय के लिए सीमित हो गई थी। अब अदालत से राहत मिलने के बाद उनके समर्थकों में नया उत्साह देखा जा रहा है।
बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक सफर 1988 में भाजपा से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और इसके बाद कई बार सांसद चुने गए। वे भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी रहे और कुश्ती को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन उनके पुत्र करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की। इसे बृजभूषण के राजनीतिक प्रभाव का संकेत माना गया।
अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा अवध क्षेत्र में बृजभूषण शरण सिंह की सक्रिय भूमिका को किस रूप में आगे बढ़ाती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों की करीब 50 विधानसभा सीटों पर पार्टी की चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।