गोंडा रेलवे स्टेशन पर बाल तस्करी का मामला उजागर

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जननायक एक्सप्रेस से 12 नाबालिग बच्चे मुक्त, दो युवक हिरासत में
गोंडा। रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में नाबालिग बच्चों को ले जाने का मामला सामने आया है। आरपीएफ, सीआईबी और स्वयंसेवी संस्थाओं की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जननायक एक्सप्रेस से 12 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया। मौके से दो युवकों को पकड़ा गया है। प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों को बिहार से हरियाणा ले जाकर मजदूरी कराने की बात सामने आई है।
आरपीएफ प्रभारी अनिरुद्ध प्रसाद के अनुसार, सीआईबी निरीक्षक की शिकायत के आधार पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने में मामला दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों तथा ठेकेदारों के खिलाफ बीएनएस, बाल श्रम और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
ट्रेन में बच्चों को देखकर टीम को हुआ संदेह
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम करीब छह बजे सीआईबी गोंडा और बचपन बचाओ आंदोलन की टीम ट्रेनों में सुरक्षा जांच कर रही थी। इसी दौरान बरुआचक स्टेशन से ट्रेन संख्या 15211 जननायक एक्सप्रेस गोंडा के लिए रवाना हुई। सामान्य कोच में टीम को कुछ बच्चे सहमे हुए दिखाई दिए। बच्चों की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद टीम ने उनकी निगरानी शुरू कर दी।
शाम करीब 6:15 बजे ट्रेन गोंडा रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन रुकते ही आरपीएफ और टीओपीबी टीम की मदद से बच्चों तथा उनके साथ मौजूद संदिग्ध युवकों को ट्रेन से उतारा गया। पूछताछ के दौरान दोनों युवकों की पहचान प्रमोद कुमार और विजय शाह के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार प्रमोद की उम्र करीब 19 वर्ष और विजय की उम्र 27 वर्ष है। दोनों बिहार के मोतिहारी जिले के मेहसी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।
कुरुक्षेत्र की राइस मिल में काम कराने का आरोप
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ठेकेदार अनिल और मुकेश के कहने पर बच्चों को बिहार से हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित एक राइस मिल में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे थे। आरोप है कि बच्चों के परिजनों को एडवांस रकम भी दी गई थी।
मुक्त कराए गए सभी 12 बच्चों की उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस और संबंधित टीमों ने बच्चों की मेडिकल जांच कराई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की।
किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए गए बच्चे
मेडिकल जांच के बाद सभी बच्चों को चाइल्डलाइन की देखरेख में किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आरपीएफ के मुताबिक, गोंडा रेलवे स्टेशन से नाबालिगों को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिहार ले जाई जा रही कुछ लड़कियों को स्टेशन से मुक्त कराया जा चुका है और उस मामले में भी कार्रवाई की गई थी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और इस नेटवर्क में ठेकेदारों की क्या भूमिका है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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