
ब्राह्मण बाहुल्य अयोध्या विधानसभा में सिर्फ तीन बार जीत सके ब्राह्मण उम्मीदवार
दिक्षिता मिश्रा
अयोध्या। 1989 से जातीय समीकरण के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति का असर अयोध्या में नहीं दिखा। दलगत भावनाओं में फंसकर पूरे प्रदेश की राजनीति की हवा बदलती रही लेकिन अयोध्या सीट पर मुस्लिम समुदाय को छोड़कर सभी अन्य जातियों पर यहां के मतदाताओं ने अपनी कृपा बनाए रखी। अयोध्या में सबसे अधिक मतदाता ब्राह्मण हैं लेकिन 1967 से लेकर पिछले यानि 2017 तक समीकरण के आधार पर तीन बार ब्राह्मण उम्मीदवार को विजयश्री मिली।
पौराणिक नगरी अयोध्या की स्थापना विवस्वान सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज ने किया था, ऐसी मान्यता है। 2018 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैजाबाद का नाम बदल कर अयोध्या कर दिया। अयोध्या विधानसभा का उदय 1967 में हुआ। अब तक 10 विधानसभा चुनाव हुए और 2022 में इस सीट पर 11वां चुनाव हो रहा है।
1967 में पहला चुनाव जनसंघ के वृजकिशोर अग्रवाल ने जीता था, जबकि अयोध्या में वैश्य मतदाताओं की संख्या 22000 से 30 हजार के करीब मानी जाती है। 1969 में 1969 में कांग्रेस के विश्वनाथ कपूर चुनाव जीते थे। उनके विरादरी की यहां मामूली संख्या है। 1974 में वेद प्रकाश अग्रवाल दोबारा जीते। केंद्रीय इमर्जेंसी के बाद कांग्रेस के विरोध में सीट पर पहली बार जनता पार्टी का मुखर उदय हुआ और अयोध्या से जय शंकर पाण्डेय विजयी हुए। अयोध्या ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है लेकिन जयशंकर पांडेय की जीत जनता का कांग्रेस के इमर्जेंसी का प्रतिकार था। लेकिन 1980 कांग्रेस ने पुनः वापसी की और निर्मल खत्री को विजयी बना दिया। 1985 में सुरेन्द्र प्रताप सिंह, 1989 में जनता दल से जयशंकर पांडेय जीते। 1991 में राम लहर के साथ भारतीय जनता पार्टी से लल्लू सिंह चुनाव जीते और 2007 तक वह लगातार विधायक रहे। 2012 में परिदृश्य बदला और समाजवादी पार्टी से तेजनरायन उर्फ पवन पांडेय विजयी रहे। 2017 भाजपा से वेद प्रकाश गुप्ता जीते और 2022 चुनाव के मैदान में पुनः भाग्य आजमा रहे हैं। अयोध्या के प्रेम नरायन दूबे कहते हैं कि अयोध्या में जातीय लहर कभी नहीं रही। सरस्वती विद्या मंदिर अयोध्या के प्रधानाचार्य अवनि शुक्ला कहते हैं कि यदि जातीय समीकरण की बात होती तो लल्लू सिंह कभी विधायक न बनते। यहां जातीय नहीं निष्ठा की राजनीति होती है।
इनसेट
1989 रहा जातीय राजनीति का टर्निंग समय
1989 में जनता दल की जीत हुई लेकिन यहीं से समाजवादी पार्टी का उदय हुआ। 1990 राममंदिर आंदोलन चरम पर पहुंचा और जाति व संप्रदायवाद का जन्म हुआ। इसके बाद बसपा पार्टी के समय जातीय ध्रुवीकरण को हवा मिली। धीरे-धीरे दलगत भावनाओं के वशीभूत होकर राजनीतिक खेमे में जातियों का विभाजन हो गया। हालांकि राम की नगरी जिस तरह राम ने सबको गले लगाया था उसी तरह अयोध्या की जनता ने सबको गले से लगाया।
इनसेट
अनुमानित जातीय मतदाता
ब्राह्मण 65000
वैश्य – 32000
क्षत्रिय – 28000
कायस्थ – 22000
मुस्लिम – 40000
यादव – 40000
निषाद – 24000
अनुसूचित जाति – 50000





















